
सरायकेला/झारखंड
सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह पंचायत अंतर्गत सापारुम गाँव में जंगली हाथी के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान राधा तंतुबाई (उम्र लगभग 55 से 60 वर्ष) के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगली हाथी गांव में घुस आया और इसी दौरान राधा तंतुबाई उसकी चपेट में आ गए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण भय के साए में जीने को मजबूर हैं। घटना की सूचना मिलते ही तिरुलडीह मुखिया सुधीर सिंह घटना पहुचे। वही खबर पाते ही तिरुलडीह थाना प्रभारी कौशल कुमार दल बल के साथ पहुचकर घटना की जानकारी लेकर आवश्यक करवाई में जुट गए। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को जानकारी दी गयी

सूचना मिलते ही वन विभाग के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए मृतक के परिजनों को ₹50,000 की नगद सहायता राशि प्रदान की। वहीं शेष ₹3.50 लाख की राशि कागजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनके बैंक खाते में भेजे जाने की बात कही।
घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी कौशल कुमार भी अपने दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया।

लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में हाथी दस्ता की तैनाती की जाए। साथ ही हाथियों को भगाने के लिए टॉर्च लाइट और पटाखों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा मृतक के परिजनों को यथासंभव रोजगार उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। मालुम हो कि लगातार ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथियों द्वारा क्षेत्र में उत्पात मचा रखा है,आए दिन खबर आते रहता है, कभी किसी का मकान ,दुकान तो कभी किसानों के फसल को खाकर हाथी नष्ट कर जाता है,जहां कर किसान कड़ी मेहनत से अपना फसल तैयार करता है वहीं जंगली हाथी एक ही बार में पूरा फसल को नष्ट कर जाता है, मुल रूप से पूरा ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र कृषि पर ही आश्रित है,खेत से होने वाले धान या अन्य फसल से ही यहां के लोगों का आजीविकाएं चलती है।यदि इस तरह से हाथी का आतंक बना रहा है,तो किसान खेती छोड़कर अपने आजीविका चलाने के लिए शहरों में पलायन के लिए बाध्य होंगे।

वन विभाग द्वारा हाथियों को वनों में ही रोकने हेतु उचित व्यवस्था होना चाहिए,जिससे कि आम जन मानस को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े और किसान सुगमता से अपना कृषि कार्य को बरकरार रखा सके।तथा गांवों में हाथी भगाओ दस्ता टीम बनाकर यदि किसी कारणवश हाथी जंगल से भटकर गांव की और आए तो उसको तत्काल ही जंगल की वापस भगाया जा सके।
